2024 भारत में जानिए क्या है करवा चौथ व्रत की कथा

करवा चौथ के दिन सुहागन स्त्रियां व्रत रखती हैं अथवा करवा चौथ कथा पढ़ना अनिवार्य माना गया है करवा चौथ की कई भिन्न गाथाएं हैं परंतु सब का मूल्य एक ही है करवा चौथ की कुछ प्रमुख प्रचलित कथाएं निम्न है
1 भारतीय परंपरा के अनुसार प्रथम कथा महिलाओं के अखंड सौभाग्य का प्रतीक करवा चौथ व्रत की कथा कुछ इस प्रकार है एक साहूकार के साथ लड़के और एक पुत्री थी एक बार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी करवा चौथ के दिन व्रत का पढ़ना अनिवार्य माना गया है करवा चौथ की कई गाथाएं हैं परंतु सबका मूल्य एक ही है करवा चौथ की कुछ गाथाएं निम्नलिखित हैं
1.करवा चौथ प्रथम कथा

भारतीय परंपरा के अनुसार महिलाओं के अखंड सौभाग्य का प्रतीक करवा चौथ की व्रत कथा इस प्रकार है एक साहूकार के साथ पुत्र और एक पुत्री थी एक बार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन को सेठानी सहित उनकी सातों बहुएं और उनकी बेटी ने भी करवा चौथ व्रत रखा रात्रि के समय जब साहूकार के सभी पुत्र भोजन करने बैठे तो उन्होंने अपनी बहन से भी भोज कर लेने का आग्रह किया इस पर बहन ने कहा भाई अभी आसमान में चांद नहीं निकला है चांद के निकलने पर उसे अर्क देकर ही में अपना व्रत खोलूंगी अथवा भजन करूंगी
साहूकार के सभी पुत्र अपनी बहन से बहुत प्रेम करते थे उन्हें अपनी बहन का भूख से व्याकुल चेहरा देख बहुत दुख हुआ साहूकार के बेटे नगर के बाहर चले गए और वहां एक पेड़ पर चढ़ कर एक कृत्रिम चंद बना दिया और वापस घर आकर अपनी बहन से बोले देखो प्यारी बहना चांद निकल आया है तुम अर्क देकर भोजन ग्रहण कर लो अपने भाइयों की बात सुन बहन ने अपनी भाभियों से कहा आप भी चांद को अर्क देकर भोजन कर लें तब नंद की बात सुनकर भाभियों ने कहा अभी चांद नहीं निकला है तुम्हारे भाई तुम्हें धोखा दे रहे हैं नगर से बाहर तुम्हारे भाइयों ने कृत्रिम चांद बनाया है और जो तुम्हें दिख रहा है वह चांद नहीं है
साहूकार की बेटी ने अपनी भाभियों की बात को अनसुनी करते हुए भाइयों द्वारा दिखाए गए चांद को अर्क देकर भोजन ग्रहण कर लिया इस प्रकार करवा चौथ व्रत भंग करने के कारण विघ्नहर्ता श्री गणेश जी साहूकार की लड़की पर ऑपरेशन वी क्रोधित हो गए गणेश जी की अपर्णता के कारण उसे लड़की का पति बीमार पड़ गया और घर में बचा हुआ सारा धन उसकी बीमारी में खर्च हो गया
साहूकार की बेटी को जब अपनी की हुई गलती का एहसास हुआ तो उसे बहुत पश्चाताप हुआ उसने भगवान श्री गणेश जी से क्षमा याचना प्रार्थना की और फिर से विधि विधान पूर्वक चतुर्थी का व्रत शुरू कर दिया उसने वहां उपस्थित सभी लोगों को श्रद्धा अनुसार आदर किया तट उपरांत उसने आशीर्वाद ग्रहण कियाइस प्रकार उसे साहूकार की पुत्री की श्रद्धा को देखकर भगवान श्री गणेश जी को अपार प्रसन्नता हुई और उसके पति को जीवन दान दिया भगवान श्री गणेश ने उसे सभी रोगों से मुक्त कर धन संपत्ति और वैभव से युक्त कर दिया
कहते हैं इस प्रकार यदि कोई मनुष्य छल कपट अहंकार अथवा लोग लालच को त्याग कर श्रद्धा और भक्ति पूर्ण भाव से चतुर्थी का व्रत को पूर्ण करता है तो वह जीवन में सभी दुखों और कलेशों से मुक्त हो जाता है और सुख में जीवन व्यतीत करता है
2.करवा चौथ की पौराणिक कथा

भारतीय परंपरा के अनुसार यह व्रत कार्तिक माह की चतुर्थी को मनाया जाता है इसलिए इसे करवा चौथ कहा जाता है व्रत की पौराणिकता कथा के अनुसार एक ब्राह्मण के साथ बीते वह एक वीरवती नमक पुत्री थी वीरवती ने पहली बार मायके में करवा चौथ का व्रत रखा निर्जला व्रत होने के कारण वीरवती भूख से परेशान हो रही थी तो उसके भाइयों से सह ना गया उन्होंने नगर के बाहर वृक्ष पर एक लैंटर्न जला दी और अपनी बहन से कहा देखो बहन चांद को अर्क दे दो चांद अब निकल आया है
अपने भाइयों की बात सुन वीरवती ने जैसे ही चांद को अर्क दिया और वह भोजन के लिए बैठी तो पहले एक और में बाल निकल दूसरे को में छींक आ गई और तीसरी कोर में ससुराल से बुलावा आ गया वीरवती जैसे ही ससुराल पहुंची तो वहां उसका पति मृत्यु हो चुका था अमृत पति को देख कर वीरवती विलाप करने लगी तभी इंद्राणी आई और वीरवती को 12 माह की चौथ अथवा करवा चौथ व्रत करने को कहा
तत्पश्चात वीरवती ने संपूर्ण श्रद्धा भक्ति के साथ 12 माह की चौथ अथवा करवा चौथ के व्रत को रखा जिसके प्रताप से उसके पति को पुनः जीवनदान मिल गया पति की दीर्घायु के लिए महिलाएं पुरातन काल से ही करवा चौथ का व्रत करती चली आ रही है
3.तृतीय कथा
बहुत समय पहले की बात है एक करवा नाम की पतिव्रता स्त्री अपने पति के साथ नदी के किनारे बसे एक गांव में रहती थी एक दिन उसका पति नदी में स्नान करने गया स्नान करते समय एक मगरमच्छ ने उसका पैर पकड़ लिया वह मनुष्य करवा करवा के अपनी पत्नी को पुकारने लगा
अपने पति की आवाज सुन उसकी पत्नी करवा भाग चली आई और मगरमच्छ को कच्चे धागे से बांध दिया मगर को बना देख यमराज के यहां पहुंची और यमराज से कहने लगी है भगवान मगर ने मेरे पति का पैर पकड़ लिया है आप इस मगरमच्छ को मेरे पति का पैर पकड़ने के अपराध में आप अपने बल से इस नर्क में ले जाओ
करवा की बात सुन यमराज बोले अभी मगर की आयु शेष है अतः में उसे नहीं मार सकता इस पर करवा बोली अगर आप ऐसा नहीं करेंगे तो मैं शराब देकर इस मगर को नष्ट कर दूंगी यह सुन यमराज डर गए और पतिव्रता करवा के साथ आकर मगर को यमपुरी भेज दिया और करवा के पति को दीर्घायु प्रदान की ही करवा माता जैसे तुमने अपने पति की रक्षा की है वैसे सबके पतियों की रक्षा करना यमराज बोले

4. चौथी कथा
एक समय एक बार पांडु पुत्र अर्जुन तपस्या करने निलगिरी नमक पर्वत पर चले गए इधर द्रौपदी बहुत परेशान थी उनकी कोई खैर खबर न मिलने के कारण उन्होंने भगवान श्री कृष्ण का ध्यान किया और अपनी चिंता व्यक्त की भगवान श्री कृष्ण ने कहा बहन इस तरह का प्रश्न एक बार माता पार्वती ने शंकर जी से किया था
पूजन कर चंद्रमा को अर्क देकर भोजन ग्रहण किया जाता है सोने चांदी या मिट्टी के करवे का आपस में आदान-प्रदान किया जाता है जो आपसी प्रेम भाव को बढ़ाता है पूजन करने के बाद सभी महिलाएं अपने सास ससुर एवं बड़ों को प्रणाम कर उनका आशीर्वाद लेती है
तब भगवान शंकर जी ने माता पार्वती जी को करवा व्रत की बारे में बतलाया और इस व्रत को करने से स्त्रियां अपने आने वाले संकट से दूर करती है